आनुवंशिकता एवं विकास
परिचय:
क्या आपने कभी सोचा है कि एक ही परिवार में भाई–बहन एक जैसे भी लगते हैं और फिर भी बिल्कुल एक जैसे नहीं होते? कोई पिता की तरह लंबा होता है, कोई माँ की तरह गोरा, किसी की आँखें दादी जैसी, तो किसी का स्वभाव नाना जैसा। यह सब आनुवंशिकता (Heredity) के कारण होता है, जो यह बताती है कि लक्षण एक पीढ़ी से अगली पीढ़ी तक कैसे पहुँचते हैं।
इसी के साथ एक और सवाल उठता है – अगर सभी बच्चे अपने माता–पिता जैसे ही होते रहते, तो पृथ्वी पर इतने तरह के जीव (हज़ारों प्रजातियाँ) कैसे बन गए? कुछ प्रजातियाँ खत्म क्यों हो गईं और कुछ नई कैसे विकसित हो गईं? इसका उत्तर विकास (Evolution) में छिपा है, जो लाखों वर्षों में धीरे–धीरे होने वाले परिवर्तनों की कहानी है।
CBSE कक्षा 10 विज्ञान का अध्याय “आनुवंशिकता एवं विकास” बोर्ड परीक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, जिससे सामान्यतः 7–10 अंकों के प्रश्न पूछे जाते हैं। इस अध्याय में से अवधारणात्मक और तर्क–आधारित (reasoning) प्रश्न अधिक आते हैं, जैसे – लिंग निर्धारण कैसे होता है, 3:1 अनुपात क्यों मिलता है, acquired traits evolution में क्यों नहीं जाते, homologous और analogous अंगों में अंतर आदि।
इस अध्याय में हम चार मुख्य बातों को समझेंगे –
1. प्रजनन के दौरान विविधता (variation) कैसे बनती और जमा होती है।
2. आनुवंशिकता के नियम (Mendel के नियम) – यानी लक्षण कैसे विरासत में मिलते हैं।
3. विकास (Evolution) – जीवों में समय के साथ परिवर्तन की प्रक्रिया और उसके प्रमाण।
4. मनुष्य सहित जीवों का विकासीय इतिहास (evolutionary history) और उसका वर्गीकरण से संबंध।
प्रजनन के दौरान विविधता का संचय (Accumulation of Variation)
जब भी कोई जीव प्रजनन करता है, तो नए जीव (संतान) बनते हैं। ये संतानें अपने जनकों से बहुत मिलती–जुलती हैं, लेकिन बिल्कुल कॉपी नहीं होतीं। इन छोटे–छोटे अंतर को विविधता (Variation) कहते हैं।
अलैंगिक बनाम लैंगिक प्रजनन में विविधता
अलैंगिक प्रजनन में केवल एक जनक होता है, DNA की कॉपी लगभग हूबहू बनती है, इसलिए विविधता बहुत कम होती है। केवल DNA copying की छोटी–मोटी गलती से variation आता है।
लैंगिक प्रजनन में दो जनक (नर और मादा) होते हैं, दोनों से आधा–आधा DNA मिलता है, इसलिए DNA के नए संयोजन बनते हैं और विविधता बहुत अधिक होती है।
इसी विविधता के कारण किसी प्रजाति के कुछ सदस्य प्रतिकूल परिस्थितियों (जैसे तापमान में बदलाव, बीमारी, भोजन की कमी) को सहन कर पाते हैं और जीवित रहते हैं। इस प्रकार variation किसी प्रजाति के जीवित रहने और विकास के लिए आवश्यक है।
"Rebuilding a World Economy (1945-1960s)" का COMPLETE NOTES
आनुवंशिकता (Heredity) और मूल शब्दावली
आनुवंशिकता (Heredity) वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा लक्षण (traits) माता–पिता से उनकी संतानों में स्थानांतरित होते हैं।
जीन, गुणसूत्र और DNA
गुणसूत्र (Chromosomes): कोशिका के केंद्रक में पाए जाने वाले धागेनुमा संरचनाएँ, जो आनुवंशिक पदार्थ (DNA) से बनी होती हैं।
DNA (Deoxyribonucleic Acid): लंबा अणु जो सभी आनुवंशिक जानकारी code के रूप में रखता है। यही “blueprint of life” है।
जीन (Gene): DNA का छोटा खंड जो किसी विशेष लक्षण (जैसे आँखों का रंग, कद) को नियंत्रित करता है। जीन की विभिन्न रूपांतरित अवस्थाओं को एलील (alleles) कहते हैं।
हर गुणसूत्र युग्म में दो–दो जीन (alleles) होते हैं – एक माता से और एक पिता से।
जीनोटाइप और फीनोटाइप
जीनोटाइप (Genotype): किसी जीव की आनुवंशिक बनावट – यानी जीनों का संयोजन (जैसे TT, Tt, tt)।
फीनोटाइप (Phenotype): बाहरी दिखने वाला लक्षण, जो जीन और वातावरण दोनों के असर से बनता है (जैसे लंबा या बौना कद)।
प्रबल (Dominant) और अप्रबल (Recessive) लक्षण
· प्रबल लक्षण: वह लक्षण जो विषमयुग्मजी अवस्था (Tt) में भी प्रकट होता है (जैसे tall plant के लिए T)।
· अप्रबल लक्षण: वह लक्षण जो केवल समजात अप्रबल अवस्था (tt) में ही प्रकट होता है (जैसे dwarf plant)।
कक्षा 10 विज्ञान - अध्याय 7 "जीव जनन कैसे करते हैं" - सम्पूर्ण नोट्स
मेंडल के प्रयोग और नियम (Mendel’s Experiments)
Gregor Johann Mendel को “आधुनिक आनुवंशिकी का जनक” कहा जाता है। उन्होंने मटर के पौधों पर प्रयोग करके यह दिखाया कि लक्षण कैसे अगली पीढ़ी में जाते हैं।
मटर के पौधे का चयन क्यों?
· जीवन–चक्र छोटा होता है
· बहुत सारे बीज मिल जाते हैं
· कई contrasting traits मौजूद (लंबा/बौना, गोल/झुर्रीदार, पीला/हरा आदि)
· स्व–परागण और पर–परागण दोनों किया जा सकता है
एकल लक्षण संकरण (Monohybrid Cross) – 3:1 अनुपात
उदाहरण: लंबा (Tall, T) × बौना (Dwarf, t) पौधा
· P पीढ़ी (Parents):
o शुद्ध लंबा (TT)
o शुद्ध बौना (tt)
· F1 पीढ़ी:
o सभी पौधे लंबे (Tt) – प्रबल लक्षण (tall) प्रकट होता है
o जीनोटाइप = Tt, फीनोटाइप = tall
·
F2
पीढ़ी (F1 × F1 → Tt × Tt):
Punnett square से संयोजन: TT, Tt, Tt, tt
o Genotypic ratio: 1 TT : 2 Tt : 1 tt
o Phenotypic ratio: 3 tall : 1 dwarf
इसी 3:1 अनुपात को मेंडल का महत्वपूर्ण परिणाम माना गया।
मेंडल का प्रथम नियम – गुणों का पृथक्करण (Law of Segregation)
यह नियम कहता है कि किसी लक्षण के दो जीन (alleles) युग्मकोजनन (gamete formation) के समय अलग–अलग हो जाते हैं और हर युग्मक में केवल एक जीन जाता है।
द्विलक्षण संकरण (Dihybrid Cross) – 9:3:3:1 अनुपात
जब दो लक्षणों को एक साथ देखा जाता है, जैसे:
· गोल पीले बीज (RRYY) × झुर्रीदार हरे बीज (rryy)
तो F2 पीढ़ी में 9:3:3:1 का अनुपात मिलता है (दोनों traits के नए संयोजन के साथ)। इससे मेंडल ने निष्कर्ष निकाला कि अलग–अलग लक्षणों के जीन स्वतंत्र रूप से वर्गीकृत (independently assort) होते हैं। इसे मेंडल का द्वितीय नियम कहते हैं।
कक्षा 10 विज्ञान | अध्याय: नियंत्रण एवं समन्वय
अर्जित और वंशानुगत लक्षण (Acquired vs Inherited Traits)
·
वंशानुगत लक्षण (Inherited traits):
जीन के माध्यम से माता–पिता से संतान में आने वाले लक्षण (जैसे आँखों का रंग, रक्त समूह, कद की प्रवृत्ति)।
·
अर्जित लक्षण (Acquired traits):
जीवनकाल के दौरान पर्यावरण या अभ्यास से प्राप्त लक्षण (जैसे जिम करके मांसपेशियों का बढ़ना, कान छिदवाना, टैटू बनवाना)।
लक्षणों की अभिव्यक्ति (Expression of Traits)
जीन सीधे–सीधे लक्षण नहीं बनाते, बल्कि प्रोटीन बनाते हैं।
· जीन → प्रोटीन के लिए code → विशेष प्रकार का प्रोटीन → कोशिकाओं का ढांचा/कार्य बदलता है → लक्षण प्रकट होता है।
उदाहरण: कद नियंत्रित करने वाले जीन ऐसे प्रोटीन बनाएँगे जो वृद्धि हार्मोन की मात्रा, हड्डियों की वृद्धि आदि को प्रभावित करें।
कक्षा 10 विज्ञान | अध्याय: जैव प्रक्रम (Life Processes)
मनुष्यों में लिंग निर्धारण (Sex Determination in Humans)
मनुष्यों में 23 जोड़ी गुणसूत्र होते हैं; इनमें से 22 जोड़ी सामान्य गुणसूत्र (autosomes) और 1 जोड़ी लैंगिक गुणसूत्र (sex chromosomes) होती है।
· महिलाओं का लैंगिक गुणसूत्र संयोजन: XX
· पुरुषों का लैंगिक गुणसूत्र संयोजन: XY
कौन तय करता है – लड़का या लड़की?
· प्रत्येक अंडाणु (ovum) में हमेशा X गुणसूत्र होता है (क्योंकि महिला XX है)।
· पुरुष से दो प्रकार के शुक्राणु बनते हैं – X वाले और Y वाले (लगभग 50–50%)।
यदि:
· X शुक्राणु + X अंडाणु → XX (लड़की)
· Y शुक्राणु + X अंडाणु → XY (लड़का)
इसलिए बच्चे का लिंग शुक्राणु (father) पर निर्भर करता है, माँ पर नहीं। यह बोर्ड में बार–बार पूछा जाने वाला तर्क–आधारित प्रश्न है।
CHAPTER 3! The Making of a Global World – Part 1: पूर्व-आधुनिक विश्व – The Pre-Modern World.
विकास (Evolution) – मूल अवधारणा
विकास (Evolution) वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा समय के साथ–साथ प्रजातियों की संरचना और गुण–धर्म बदलते हैं और नई–नई प्रजातियाँ बनती हैं।
· यह अचानक नहीं, बल्कि धीरे–धीरे अनेक पीढ़ियों में होता है।
· यह variations और प्राकृतिक वरण (Natural Selection) पर आधारित है।
Darwin का natural selection (सरल language)
Charles Darwin ने सुझाव दिया कि:
· किसी भी प्रजाति में हल्की–फुल्की विविधताएँ होती हैं।
· पर्यावरण में “struggle for existence” होता है – सभी को भोजन, स्थान, साथी नहीं मिलता।
· जिन जीवों के लक्षण वातावरण के अनुसार बेहतर होते हैं, वे अधिक survive करते हैं और अधिक संतानें छोड़ते हैं – survival of the fittest।
· धीरे–धीरे वही लक्षण population में common हो जाते हैं – यही evolution है।
कक्षा 10 विज्ञान | अध्याय 4: कार्बन एवं उसके यौगिक (Carbon and Its Compounds).
विकास के प्रमाण (Evidence for Evolution)
बोर्ड परीक्षा में यह भाग बहुत पसंद किया जाता है – short notes या reasoning आधारित प्रश्न के रूप में।
समजात अंग (Homologous Organs)
· संरचना और मूल (origin) समान, लेकिन कार्य अलग–अलग।
· उदाहरण: मानव का अग्रबाहु, पक्षी का पंख, घोड़े की टांग, व्हेल की फ्लिपर – सभी की हड्डियों की मूल संरचना समान है, पर कार्य अलग हैं।
· यह सामान्य पूर्वज (common ancestry) को दर्शाता है।
असमजात अंग (Analogous Organs)
· कार्य समान, लेकिन संरचना और मूल भिन्न।
· उदाहरण: पक्षी का पंख और कीट का पंख – दोनों उड़ने के काम आते हैं, लेकिन बनावट अलग है।
· यह दिखाता है कि भिन्न–भिन्न तरीके से समान कार्य के लिए अंग विकसित हो सकते हैं (convergent evolution)।
जीवाश्म (Fossils)
· प्राचीन जीवों के अवशेष या छाप जो चट्टानों में संरक्षित होते हैं।
· ये बताते हैं कि पुराने समय में कौन–कौन सी प्रजातियाँ थीं और वे आज की प्रजातियों से कैसे मिलती–जुलती या अलग थीं।
· उदाहरण: कुछ जीवाश्म ऐसे हैं जो सरीसृप और पक्षी दोनों के लक्षण दिखाते हैं – इन्हें “transition forms” माना जाता है।
भ्रूणीय समानताएँ (Embryological Similarities – concept level)
प्रारंभिक भ्रूण अवस्था में विभिन्न कशेरुकी (vertebrates) – जैसे मछली, मेंढ़क, पक्षी, मनुष्य – में काफी समानताएँ दिखाई देती हैं, जो उनके समान पूर्वज की ओर संकेत करती हैं।
CHAPTER 2 COMPLETE! Part 4 = सामूहिक अपनेपन की भावना
प्रजातिकरण (Speciation) – नई प्रजातियों का बनना
प्रजाति (Species): ऐसे जीवों का समूह जो आपस में प्रजनन करके सक्षम (fertile) संतति उत्पन्न कर सके।
प्रजातिकरण (Speciation): नई प्रजातियों के बनने की प्रक्रिया।
मुख्य कारक:
· भौगोलिक अलगाव (Geographical isolation):
o किसी population के दो भाग पहाड़, नदी, समुद्र आदि के कारण अलग–अलग क्षेत्र में बँट जाएँ।
· जननात्मक अलगाव (Reproductive isolation):
o लंबे समय तक अलग–अलग पर्यावरण में रहने से उनके लक्षण और DNA इतने बदल जाएँ कि वे आपस में प्रजनन ही न कर सकें।
· प्राकृतिक वरण, genetic drift, mutation आदि भी इसमें सहायक होते हैं।
विकास और वर्गीकरण (Evolution and Classification)
आज जो भी वैज्ञानिक वर्गीकरण (Kingdom, Phylum, Class, Order, Family, Genus, Species) है, वह केवल बाहरी समानता पर आधारित नहीं है, बल्कि विकासीय संबंध (evolutionary relationships) पर भी आधारित है।
· जिन जीवों में अधिक समानताएँ हैं, वे वर्गीकरण में एक–दूसरे के अधिक नज़दीक रखे जाते हैं – इसका मतलब है कि उनकी common ancestor अपेक्षाकृत हाल की है।
· इसी तरह, जो जीव वर्गीकरण में दूर–दूर रखे गए हैं, उनके पूर्वज बहुत पहले अलग हो गए होंगे।
इस तरह classification हमें evolution का एक tree–like diagram (evolutionary tree) कल्पना करने में मदद करता है।
कक्षा 10 विज्ञान अध्याय 3: धातु एवं अधातु | Complete Notes
मानव विकास (Human Evolution)
मानव (Homo sapiens) भी अन्य जीवों की तरह evolution का परिणाम है।
वैज्ञानिकों ने जीवाश्म, DNA sequence, शरीर रचना और उपकरणों के अध्ययन से पाया कि आधुनिक मनुष्य का एक सामान्य पूर्वज अफ्रीका क्षेत्र में रहा होगा।
धीरे–धीरे विभिन्न मानव–प्रकार विकसित हुए –
· दिमाग का आकार बढ़ा
· सीधा खड़ा होकर चलने की क्षमता विकसित हुई
· हाथों से उपकरण बनाना और प्रयोग करना शुरू हुआ
· भाषा और सामाजिक संगठन विकसित हुए
महत्वपूर्ण बात यह है कि evolution को “निचले से ऊँचे” होने वाली linear progress की तरह नहीं देखना चाहिए, बल्कि इसे शाखाओं वाले पेड़ (branching tree) की तरह समझना चाहिए, जहाँ अलग–अलग शाखाओं पर अलग–अलग species विकसित होती हैं।
Class 10 Science chapter: “अम्ल, क्षारक एवं लवण (Acids, Bases and Salts)”
📝 MCQs (PYQ)
प्रश्न 1. वह
इकाई जो
वंशानुगत लक्षणों
को नियंत्रित
करती है,
कहलाती है
–
(क) गुणसूत्र
(ख) जीन
(ग) DNA
(घ) प्रोटीन
उत्तर: (ख) जीन
प्रश्न 2. मनुष्यों
में लड़का
या लड़की
होने का
निर्धारण किस
पर निर्भर
करता है?
(क) माँ के अंडाणु पर
(ख) पिता के शुक्राणु पर
(ग) दोनों के गुणसूत्र समान रूप से
(घ) वातावरण पर
उत्तर: (ख) पिता के शुक्राणु पर
प्रश्न 3. मेंडल
ने अपने
प्रयोग किस
पौधे पर
किए थे?
(क) मक्का
(ख) मटर
(ग) गेहूँ
(घ) सरसों
उत्तर: (ख) मटर
प्रश्न 4. किसी
लक्षण के
दो रूप
(जैसे T और
t) पाए जाते
हैं – इन्हें
क्या कहते
हैं?
(क) Alleles (एलील)
(ख) जीनोटाइप
(ग) फीनोटाइप
(घ) गुणसूत्र
उत्तर: (क) Alleles (एलील)
प्रश्न 5. Tall (Tt) × Tall (Tt) मटर के
पौधों के
संकरण पर
F2 पीढ़ी में
लंबे और
बौने पौधों
का phenotypic अनुपात होगा
–
(क) 1 : 1
(ख) 2 : 1
(ग) 3 : 1
(घ) 1 : 3
उत्तर: (ग) 3 : 1
प्रश्न 6. वह
लक्षण जो
विषमयुग्मजी (Tt) अवस्था में
भी व्यक्त
हो जाता
है, कहलाता
है –
(क) अप्रबल (Recessive)
(ख) प्रबल (Dominant)
(ग) अर्जित (Acquired)
(घ) परिवर्तनशील (Variable)
उत्तर: (ख) प्रबल (Dominant)
प्रश्न 7. पक्षी
का पंख
और कीट
का पंख
किस प्रकार
के अंगों
का उदाहरण
हैं?
(क) समजात अंग (Homologous)
(ख) असमजात अंग (Analogous)
(ग) अवशिष्ट अंग
(घ) परिवर्तित अंग
उत्तर: (ख) असमजात अंग (Analogous)
प्रश्न 8. मानव
में गुणसूत्रों
की कुल
संख्या कितनी
होती है?
(क) 22
(ख) 23
(ग) 44
(घ) 46
उत्तर: (घ) 46
प्रश्न 9. निम्न
में से
कौन–सा
अर्जित लक्षण
(Acquired trait) है?
(क) रक्त समूह
(ख) आँखों का रंग
(ग) कान छिदवाना
(घ) कद की प्रवृत्ति
उत्तर: (ग) कान छिदवाना
प्रश्न 10. किसी प्रजाति
के नए
प्रकार (new species) के बनने
की प्रक्रिया
कहलाती है
–
(क) Speciation (प्रजातिकरण)
(ख) Variation (विविधता)
(ग) Heredity (आनुवंशिकता)
(घ) Natural selection (प्राकृतिक वरण)
उत्तर: (क) Speciation (प्रजातिकरण)
✍️ Short Answer
प्रश्न 1. अर्जित लक्षण और वंशानुगत (आनुवंशिक) लक्षण में अंतर लिखिए, उदाहरण सहित। (CBSE PYQ)
उत्तर:
·
अर्जित लक्षण (Acquired traits):
ऐसे लक्षण जो किसी जीव द्वारा अपने जीवनकाल में पर्यावरण या अभ्यास के कारण प्राप्त किए जाते हैं, इन्हें अगली पीढ़ी में स्थानांतरित नहीं किया जाता क्योंकि ये जीन या germ cells के DNA में परिवर्तन नहीं लाते।
o उदाहरण: जिम करके मांसपेशियों का बढ़ना, त्वचा का सांवला पड़ना, कान छिदवाना।
वंशानुगत लक्षण (Inherited traits):
ऐसे लक्षण जो जीन के माध्यम से माता–पिता से संतान में स्थानांतरित होते हैं और पीढ़ी–दर–पीढ़ी चलते रहते हैं।
· उदाहरण: रक्त समूह, आँखों का रंग, कद की प्रवृत्ति।
प्रश्न 2. समजात (Homologous) और असमजात (Analogous) अंग क्या हैं? प्रत्येक के एक–एक उदाहरण दीजिए। (CBSE 2017, 2019)
उत्तर:
·
समजात अंग (Homologous organs):
जिन अंगों की मूल संरचना और origin समान हो, परन्तु कार्य भिन्न–भिन्न हों, उन्हें समजात अंग कहते हैं। ये common ancestry का प्रमाण हैं।
o उदाहरण: मानव का अग्रबाहु, पक्षी का पंख, घोड़े की टांग, व्हेल की फ्लिपर।
असमजात अंग (Analogous organs):
जिन अंगों का कार्य समान हो, परन्तु संरचना और origin अलग–अलग हो, उन्हें असमजात अंग कहते हैं। ये convergent evolution का उदाहरण हैं।
· उदाहरण: पक्षी का पंख और कीट का पंख; डॉलफिन की फ्लिपर और मछली का पंख।
प्रश्न 3. “बच्चे का लिंग निर्धारण पिता पर निर्भर करता है’’ – कथन को उचित ठहराइए। (CBSE 2015, 2017)
उत्तर:
· मनुष्यों में महिलाओं का लैंगिक गुणसूत्र संयोजन XX और पुरुषों का XY होता है।
मादा के सभी अंडाणुओं में X गुणसूत्र होता है, जबकि नर से दो प्रकार के शुक्राणु बनते हैं – X वाले और Y वाले।
यदि X शुक्राणु X अंडाणु से मिलकर XX बनाता है तो बच्ची (girl) जन्म लेती है, और यदि Y शुक्राणु X अंडाणु से मिलकर XY बनाता है तो बच्चा (boy) जन्म लेता है।
अतः बच्चे के लिंग का निर्धारण इस बात पर निर्भर करता है कि कौन–सा शुक्राणु (X या Y) अंडाणु से संलयित होता है; इसलिए यह निर्धारण पिता पर निर्भर है, माँ पर नहीं।
प्रश्न 4. Heredity (आनुवंशिकता) क्या है? यह evolution में कैसे सहायक है? (Concept + PYQ blend)
उत्तर:
·
आनुवंशिकता (Heredity):
वह प्रक्रिया जिसके द्वारा लक्षण (traits) जीन और गुणसूत्रों के माध्यम से एक पीढ़ी से अगली पीढ़ी को स्थानांतरित होते हैं, आनुवंशिकता कहलाती है।
Evolution में भूमिका:
· प्रजनन के दौरान DNA में छोटे–छोटे परिवर्तन (variations) होते हैं।
यदि कोई variation उपयोगी है, तो वह natural selection के कारण population में फैल सकता है।
अनेक पीढ़ियों में इन variations के संचय से प्रजातियों में स्थायी परिवर्तन होते हैं – यही evolution है।
प्रश्न 5. जीवाश्म (Fossils) क्या होते हैं? ये evolution के प्रमाण के रूप में कैसे सहायक हैं? (CBSE 2015, 2017)
उत्तर:
·
जीवाश्म (Fossils):
प्राचीन जीवों के अवशेष, कंकाल, पदचिह्न या छाप जो चट्टानों की परतों में लंबे समय तक संरक्षित रहते हैं, जीवाश्म कहलाते हैं।
Evolution के प्रमाण के रूप में भूमिका:
जीवाश्म बताते हैं कि धरती पर अलग–अलग समय पर किन–किन प्रकार के जीव मौजूद थे।
कुछ जीवाश्म ऐसे हैं जिनमें दो समूहों (जैसे सरीसृप और पक्षी) दोनों के लक्षण मिलते हैं, इन्हें transition forms कहा जाता है, जो यह दिखाते हैं कि नई प्रजातियाँ पुरानी से विकसित हुई हैं।
चट्टानों की गहरी परतों में पाए जाने वाले जीवाश्म अधिक पुराने होते हैं, इससे क्रमिक विकास (gradual evolution) का क्रम समझा जा सकता है।
✍️ Long Answer
प्रश्न 1. एकल लक्षण संकरण (Monohybrid cross) द्वारा मेंडल के प्रथम नियम (Law of Segregation) को समझाइए। Tall और dwarf मटर के पौधों का उदाहरण लीजिए। (CBSE PYQ)
उत्तर:
(क) प्रयोग का सेट–अप:
· मेंडल ने मटर के पौधों में कद के लिए एक जोड़ी शुद्ध रेखा वाले पौधों का चयन किया –
o शुद्ध लंबा पौधा (TT)
o शुद्ध बौना पौधा (tt)
(ख) P पीढ़ी (Parents):
· Genotype: TT × tt
· Gametes:
o TT → केवल T
o tt → केवल t
(ग) F1 पीढ़ी (First Filial Generation):
· संयोजन: T (from TT) + t (from tt) → Tt
· सभी F1 पौधों का genotype Tt और phenotype लंबा (tall) होता है, क्योंकि T प्रबल (dominant) और t अप्रबल (recessive) है।
(घ) F2 पीढ़ी (F1 × F1):
· F1 plants: Tt × Tt
· Gametes:
o Tt → T और t
· Punnett square:
o TT, Tt, Tt, tt
इससे मिलता है:
· Genotypic ratio = 1 TT : 2 Tt : 1 tt
· Phenotypic ratio = 3 tall : 1 dwarf
(ङ) मेंडल का प्रथम नियम – गुणों का पृथक्करण:
· किसी लक्षण के दो जीन (alleles) meiosis के समय युग्मकोजनन में अलग–अलग हो जाते हैं।
· प्रत्येक gamete में किसी लक्षण के लिए केवल एक allele (T या t) जाता है।
· fertilization के समय random combination से नए genotype बनते हैं (TT, Tt, tt)।
इस प्रकार monohybrid cross से मेंडल ने दिखाया कि:
· F1 में केवल प्रबल लक्षण व्यक्त होता है, अप्रबल लक्षण छिपा रहता है।
· F2 में अप्रबल लक्षण पुनः प्रकट होता है, 3:1 के ratio में।
प्रश्न 2. “Variation species की survival और evolution के लिए महत्वपूर्ण है।” इस कथन को तीन बिंदुओं में समझाइए। (NCERT PYQ)
उत्तर:
(1) बदलते पर्यावरण में अनुकूलन:
पर्यावरण में हमेशा परिवर्तन होता रहता है – तापमान, वर्षा, भोजन की उपलब्धता, रोग–कारक जीव आदि बदलते रहते हैं।
यदि किसी population के सभी individuals बिल्कुल समान हों और कोई अचानक प्रतिकूल स्थिति (जैसे नई बीमारी) आए, तो संभव है कि पूरी population नष्ट हो जाए।
लेकिन variations के कारण कुछ individuals ऐसे हो सकते हैं जिनमें उस बीमारी के प्रति प्रतिरोधक क्षमता हो; वे survive करेंगे और अपनी अगली पीढ़ी देंगे।
(2) Natural selection के लिए कच्चा माल:
Darwin के अनुसार Natural selection उन्हीं variations को चुनेगा जो जीव के लिए लाभदायक हैं।
इन favourable variations वाले जीव अधिक survive कर पाएँगे और अधिक संतानें छोड़ेंगे, जिससे वही variations population में बढ़ते जाएँगे।
(3) नई प्रजातियों (New species) के बनने का आधार:
जब variations लंबे समय तक जमा होते रहते हैं और population के दो समूह अलग–अलग पर्यावरण में रहते हैं, तो उनके लक्षण इतने बदल सकते हैं कि वे आपस में प्रजनन करने में सक्षम न रहें – इसे speciation कहते हैं।
इस प्रकार variations ही नई species के बनने, यानी evolution के लिए आवश्यक हैं।
इसीलिए कहा जाता है कि “Without variation, there is no evolution.”
प्रश्न 3. समजात अंग, असमजात अंग और जीवाश्म – ये तीनों evolution के पक्ष में कैसे प्रमाण देते हैं? प्रत्येक के लिए एक–एक उदाहरण सहित समझाइए। (Delhi 2017, AI 2019)
उत्तर:
(क) समजात अंग (Homologous organs):
ऐसे अंग जिनकी मूल संरचना और origin समान हो, परन्तु कार्य अलग–अलग हो।
उदाहरण: मानव का हाथ, बिल्ली का अग्रबाहु, पक्षी का पंख और व्हेल की फ्लिपर – सभी में ह्यूमरस, रेडियस, अल्ना, कार्पल्स, मेटाकार्पल्स और falanges जैसी हड्डियाँ होती हैं।
यह समानता दर्शाती है कि इन सभी के पूर्वज में यह मूल संरचना मौजूद थी – यानी ये common ancestry का प्रमाण हैं।
(ख) असमजात अंग (Analogous organs):
ऐसे अंग जिनका कार्य समान हो, परन्तु संरचना और origin अलग–अलग हो।
उदाहरण: पक्षी का पंख और कीट का पंख – दोनों उड़ने के लिए हैं, परन्तु उनका विकास अलग–अलग दिशा में हुआ है।
यह convergent evolution का उदाहरण है, जहाँ अलग–अलग ancestors से निकले अंग समान पर्यावरणीय दबावों के कारण समान कार्य के लिए अनुकूलित होते हैं।
(ग) जीवाश्म (Fossils):
जीवाश्म प्राचीन जीवों के अवशेष हैं जो चट्टानों की परतों में सुरक्षित पाए जाते हैं।
इनसे हमें पता चलता है कि समय के साथ–साथ जीवों की संरचना कैसे बदलती गई, कौन–कौन सी प्रजातियाँ extinct हो गईं और कौन–सी नई बनीं।
कुछ जीवाश्म जैसे Archaeopteryx सरीसृप और पक्षी दोनों के लक्षण दिखाते हैं – यह transition form evolution की श्रृंखला को स्पष्ट करता है।
इन तीनों प्रकार के साक्ष्य evolution के सिद्धांत को मजबूत support देते हैं।
प्रश्न 4. Speciation (प्रजातिकरण) क्या है? प्रजाति बनने में तीन प्रमुख कारकों – भौगोलिक अलगाव, आनुवंशिक विचलन (genetic drift) और प्राकृतिक वरण – की भूमिका समझाइए। (CBSE pattern)
उत्तर:
प्रजाति (Species):
ऐसे जीवों का समूह जो आपस में प्रजनन कर सके और सक्षम (fertile) संतान
पैदा कर सके, प्रजाति कहलाता है।
प्रजातिकरण (Speciation):
नई species बनने की प्रक्रिया को प्रजातिकरण कहते हैं।
मुख्य कारक –
(1) भौगोलिक अलगाव (Geographical isolation):
· किसी population के दो समूह पहाड़, नदी, समुद्र, रेगिस्तान आदि के कारण अलग–अलग क्षेत्रों में फँस जाएँ।
· इनके बीच अब gene flow बंद हो जाता है, यानी ये आपस में प्रजनन नहीं कर पाते।
(2) आनुवंशिक विचलन (Genetic drift):
· छोटे population में संयोगवश (by chance) कुछ जीन अधिक और कुछ कम हो सकते हैं, भले ही वे विशेष लाभ न देते हों।
· समय के साथ–साथ यह “drift” दोनों populations के जीन–संयोजन (gene pool) को अलग–अलग बना सकती है।
(3) प्राकृतिक वरण (Natural selection):
· दोनों क्षेत्रों में पर्यावरण अलग–अलग हो सकता है – जैसे तापमान, भोजन, शिकारी, रोग आदि।
· प्रत्येक क्षेत्र में वे variations अधिक सफल होंगे जो वहाँ के पर्यावरण के अनुसार लाभदायक हों।
· इस तरह दोनों populations में अलग–अलग traits select होंगे और अंतर बढ़ता जाएगा।
परिणाम:
· लम्बे समय तक ऐसा होने पर दोनों समूहों में इतने अंतर हो सकते हैं कि यदि वे फिर से मिल जाएँ, तब भी वे आपस में प्रजनन न कर सकें।
· इस स्थिति में हम कहते हैं कि नई species बन गई है – यानी speciation हो चुका है।
प्रश्न 5. Lamarck और Darwin द्वारा प्रस्तावित विकास के विचारों में मुख्य अंतर स्पष्ट कीजिए। साथ ही Darwin के Natural selection की तीन मुख्य बातों को समझाइए। (CBSE PYQ)
उत्तर:
Lamarck का विचार (Theory of Inheritance of Acquired Characters):
· Jean Baptiste Lamarck के अनुसार जीव अपने जीवनकाल में जिन अंगों का अधिक उपयोग करते हैं वे विकसित हो जाते हैं और जिनका कम उपयोग करते हैं वे अविकसित हो जाते हैं।
· उन्हीं developed या degenerated अंगों के लक्षण (acquired traits) अगली पीढ़ी में चले जाते हैं।
· उदाहरण: जिराफ़ के पूर्वजों ने ऊँचे पेड़ों की पत्तियाँ खाने के लिए अपनी गर्दन को बार–बार खींचा, इसलिए गर्दन लंबी हो गई और यह लक्षण उनकी संतानों में भी चला गया।
Darwin का विचार (Theory of Natural Selection):
· Charles Darwin ने कहा कि प्रकृति में individuals में पहले से ही variations मौजूद रहते हैं।
· ये variations उपयोगी भी हो सकते हैं और हानिकारक भी, लेकिन ये acquired नहीं, inherited होते हैं।
·
Darwin के Natural Selection की तीन मुख्य बातें:
1. Variation (विविधता):
o किसी भी population में सभी individuals समान नहीं होते, उनमें छोटे–छोटे अंतर होते हैं (जैसे कद, रंग, गति, भोजन पचाने की क्षमता आदि)।
Struggle for existence (अस्तित्व के लिए संघर्ष):
· संसाधन (food, space, mates) सीमित हैं, इसलिए जीवों में competition होता है।
· हर प्रजाति आवश्यकता से अधिक संतानें पैदा करती है, परन्तु सभी survive नहीं कर पातीं।
Survival of the fittest and natural selection (योग्यतम की उत्तरजीविता):
· जिन individuals के traits किसी environment में अधिक लाभदायक हैं वे अधिक survive करेंगे, अधिक संतानें छोड़ेंगे।
· ऐसे favourable traits अगली पीढ़ियों में अधिक मात्रा में पहुँचेंगे, जबकि unfavourable traits धीरे–धीरे कम होते जाएँगे।
मुख्य अंतर:
· Lamarck ने acquired traits (जीवनकाल में अर्जित) के inheritance पर ज़ोर दिया, जबकि Darwin ने inherited variations और उनके natural selection पर।
आधुनिक आनुवंशिकी के अनुसार Darwin की theory अधिक वैज्ञानिक रूप से समर्थित मानी जाती है, जबकि Lamarck का सिद्धांत सामान्यतः स्वीकार नहीं किया जाता।
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निष्कर्ष
“आनुवंशिकता एवं विकास” अध्याय हमें दो महत्वपूर्ण सवालों के जवाब देता है –
1. हम अपने माता–पिता जैसे क्यों होते हैं?
2. पृथ्वी पर इतने प्रकार के जीव कैसे बने और बदलते कैसे रहते हैं?
आनुवंशिकता के माध्यम से लक्षण एक पीढ़ी से अगली पीढ़ी तक DNA और जीन के द्वारा जाते हैं। Mendel के सरल मटर–प्रयोगों ने inheritance के मूल नियम दिए – segregation और independent assortment – जिससे हम समझते हैं कि traits किस ratio में अगली पीढ़ी में दिखते हैं।
लैंगिक प्रजनन और variations evolution की नींव रखते हैं। कुछ variations उपयोगी साबित होते हैं और natural selection के कारण population में फैल जाते हैं; यही species में धीरे–धीरे स्थायी परिवर्तन लाते हैं। Homologous organs, analogous organs और जीवाश्म जैसे प्रमाण बताते हैं कि अलग–अलग species के बीच गहरा संबंध है।
मनुष्यों में sex determination का model XX–XY प्रणाली पर आधारित है, जिसमें लिंग का निर्धारण father के शुक्राणु पर निर्भर करता है – यह बात सामाजिक दृष्टि से भी बहुत महत्वपूर्ण है। प्रजातिकरण, वर्गीकरण और मानव evolution के अध्ययन से हमें समझ आता है कि हम पूरा जीव–जगत एक ही बड़े evolution tree का हिस्सा हैं।
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