गुरुवार, 5 फ़रवरी 2026

The Inter-War Economy (1919-1939) अंतर युद्ध अर्थव्यवस्था: Great Depression & Bretton Woods | Class 10 CBSE History.

अंतर युद्ध अर्थव्यवस्था

परिचय:


प्रथम विश्व युद्ध (1914-1918) के बाद की अवधि को Inter-War Period (अंतर-युद्ध काल) कहते हैं, जो 1919 से 1939 तक चली। यह विश्व इतिहास का सबसे महत्वपूर्ण और चुनौतीपूर्ण आर्थिक दौर था। इस period में दुनिया ने युद्ध के बाद पुनर्प्राप्ति के संघर्ष, 1920s के Mass Production युग, 1929 की भयानक Wall Street Crash, Great Depression (महामंदी) के विनाशकारी प्रभाव, और अंत में द्वितीय विश्व युद्ध के बाद Bretton Woods Conference (1944) में IMF और World Bank की स्थापना देखी। इस blog में हम समझेंगे कि कैसे ब्रिटेन की आर्थिक शक्ति कमजोर हुई, USA वैश्विक लेनदार बना, Great Depression ने पूरी दुनिया को झकझोर दिया, भारतीय किसानों को किस तरह की कठिनाइयों का सामना करना पड़ा, और कैसे नई अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक व्यवस्था का जन्म हुआ। यह topic CBSE Class 10 Board Exam में 15-20 marks तक के प्रश्न ला सकता है, इसलिए इसे ध्यान से पढ़ें और समझें।

प्रथम विश्व युद्ध का प्रभाव (1914-1919)

युद्ध के दौरान परिवर्तन (Wartime Transformations)

पहला आधुनिक औद्योगिक युद्ध:

·       विशाल तोपें, टैंक, विमान, रासायनिक हथियार का बड़े पैमाने पर उपयोग

·       उद्योगों का पुनर्गठन - युद्ध से संबंधित सामान का उत्पादन शुरू

·       सामान्य उत्पादन में कमी, युद्ध उत्पादन में वृद्धि

आर्थिक शक्ति का स्थानांतरण:

ब्रिटेन से USA में शक्ति स्थानांतरण:

·       ब्रिटेन ने युद्ध खर्च के लिए US बैंकों और नागरिकों से बड़ी रकम उधार ली

·       युद्ध ने अमेरिका को वैश्विक ऋणदाता से वैश्विक लेनदार में बदल दिया

·       युद्ध के अंत तक, USA के पास विदेशी सरकारों से अधिक संपत्ति थी

यूरोपीय अर्थव्यवस्था:

·       जर्मनी और ब्रिटेन बहुत कमजोर

·       युद्ध का विनाश - बुनियादी ढांचा नष्ट, उत्पादन घटा

·       विशाल कर्ज का बोझ

युद्ध के बाद आर्थिक पुनर्प्राप्ति (Post-War Recovery 1919-1925)

चुनौतीपूर्ण पुनर्प्राप्ति:

युद्ध के बाद आर्थिक पुनर्प्राप्ति बहुत चुनौतीपूर्ण थी

ब्रिटेन का गंभीर संकट:

प्रतिस्पर्धा में पिछड़ना:

·       युद्ध से पहले ब्रिटेन विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था था

·       जब ब्रिटेन युद्ध में व्यस्त था, जापान और भारत के उद्योग बढ़ रहे थे

·       युद्ध के बाद, ब्रिटेन जापान से प्रतिस्पर्धा करने और भारतीय बाजार में अपनी प्रभुता फिर से हासिल करने में संघर्ष कर रहा था

कर्ज का बोझ:

·       ब्रिटेन विशाल बाह्य कर्ज से दबा हुआ था

·       अमेरिका से उधार लिया हुआ पैसा चुकाना था

उत्पादन और बेरोजगारी:

·       युद्ध के बाद उत्पादन घटा

·       बेरोजगारी बढ़ी

·       सरकार ने शांतिकाल के राजस्व के अनुरूप युद्ध खर्च में कटौती की

औद्योगिक उत्पादन:

·       1870s से 1913 तक औद्योगिक उत्पादन केवल 2% वार्षिक बढ़ा

·       USA और Germany की वृद्धि दर से पीछे

कृषि अर्थव्यवस्था का संकट:

अत्यधिक उत्पादन:

·       पूर्वी यूरोपीय गेहूं उत्पादन फिर से शुरू हुआ

·       गेहूं का अत्यधिक उत्पादन (Overproduction)

परिणाम:

·       अनाज की लागत घटी

·       ग्रामीण आय घटी

·       किसान कर्ज बढ़ा

Gold Standard (स्वर्ण मानक) की वापसी - एक गलती

Gold Standard क्या था?

Gold Standard एक मौद्रिक प्रणाली थी जिसमें :

1.     व्यक्तियों और देशों के बीच सोने का मुक्त प्रवाह

2.     राष्ट्रीय मुद्राओं का सोने के संदर्भ में निश्चित मूल्य

3.     अंतर्राष्ट्रीय समन्वय संगठन की अनुपस्थिति

समस्याएं:

·       BOP घाटा वाले देशों में सोना बाहर चला जाता था

·       मुद्रा का मूल्य बनाए रखने के लिए deflation (अपस्फीति) करना पड़ता था

·       घरेलू कीमतें कम करनी पड़ती थीं

·       Devaluation (अवमूल्यन) का विकल्प नहीं था

ब्रिटेन की गलती - 1925:

Winston Churchill (वित्त मंत्री) का निर्णय:

·       1925 में युद्ध-पूर्व समानता पर Gold Standard पर वापसी

·       Economist John Maynard Keynes ने विरोध किया, लेकिन नहीं सुना गया

·       Keynes ने पूछा: Churchill ने "ऐसी मूर्खतापूर्ण बात क्यों की?"

परिणाम - Overvalued Pound (अधिमूल्यित पाउंड):

दो तरीकों से नुकसान:

1.     आयात सस्ता, घरेलू उद्योग प्रभावित:

o   आयात अपेक्षाकृत सस्ता हो गया

o   नए उद्योगों के विकास में बाधा

2.     निर्यात महंगा:

o   निर्यात महंगे हो गए

o   विश्व व्यापार में ब्रिटिश निर्यात का हिस्सा गिर रहा था

o   1925 के बाद निर्यात की मात्रा भी घटी

बेरोजगारी में वृद्धि:

देश

बेरोजगारी दर 1925-29 (%)

USA

7.9

France

3.8

Germany

9.2

UK

12.0

निर्यात-आधारित उद्योगों में बेरोजगारी:

·       कोयला: अन्य जगहों पर खदानें खोलने और जल शक्ति के विकास से प्रभावित

·       कपास: भारतीय घरेलू उत्पादन और सुदूर पूर्व में जापानी प्रतिस्पर्धा

·       लोहा, इस्पात, जहाज निर्माण: युद्धकाल के अत्यधिक विस्तार से पीड़ित

General Strike 1926 (आम हड़ताल):

·       4-13 मई 1926

·       खनन उद्योग में मजदूरी कटौती के प्रयास से शुरू

·       खदान मालिकों ने "lockout" किया

·       अन्य मजदूरों ने एकजुटता में हड़ताल की

·       13 दिनों के बाद Trade Union Council ने हड़ताल वापस ली

कक्षा 10 विज्ञान | अध्याय: नियंत्रण एवं समन्वय 


1920s - USA का उदय और बूम

Mass Production का युग (1920s USA)

Henry Ford और Assembly Line:

Henry Ford एक प्रसिद्ध ऑटोमोबाइल निर्माता और Mass Production के अग्रणी थे

Assembly Line System:

·       Chicago Slaughterhouse की उत्पादन प्रक्रिया से प्रेरित

·       Detroit में नए कार प्लांट में उपयोग

कैसे काम करता था:

·       कर्मचारी एक ही कार्य यांत्रिक रूप से और लगातार करते थे

·       काम की गति बढ़ाकर उत्पादन बढ़ाने की रणनीति

T-Model Ford:

·       दुनिया की पहली बड़े पैमाने पर उत्पादित कार

·       सस्ती, आम लोगों के लिए उपलब्ध

अमेरिकी पूंजी का प्रवाह:

·       1923 में USA ने बाकी विश्व में पूंजी निर्यात फिर से शुरू किया

·       सभी अन्य विदेशी ऋणदाताओं को पीछे छोड़ दिया

·       अगले छह वर्षों में, US आयात और पूंजी निर्यात ने वैश्विक अर्थव्यवस्था, यूरोपीय पुनर्प्राप्ति और आय वृद्धि में मदद की

1925-1929: "Golden Twenties"

विश्व के लिए (ब्रिटेन और जर्मनी को छोड़कर) अच्छा समय :

·       कच्चे माल और खाद्य पदार्थों का उत्पादन 11% बढ़ा

·       व्यापार 19% बढ़ा

·       विनिर्माण में व्यापार 29% बढ़ा

·       अमेरिका ने नेतृत्व किया और कई अन्य देशों को उधार दिया

NEW CHAPTER ALERT! Part 2 LIVE – The Nineteenth Century (1815-1914) उन्नीसवीं सदी: 


The Great Depression (महामंदी) 1929-1930s

शुरुआत - Wall Street Crash (October 1929)

Black Tuesday - 29 October 1929:

Stock Market Crash:

29 अक्टूबर 1929 को "Black Tuesday"

 New York Stock Exchange पर एक ही दिन में लगभग 16 मिलियन शेयर ट्रेड किए गए

  लगभग $14 बिलियन का स्टॉक मूल्य खो गया

  हजारों निवेशकों का सफाया हो गया

गिरावट का पैमाना:

 Dow Jones 30 Industrial Stocks: 3 सितंबर 1929 में 381 से गिरकर 29 अक्टूबर को 230

  8 हफ्तों में 40% गिरावट

  13 नवंबर 1929 तक 198.69 - 10 हफ्तों में 50% गिरावट

  अगले 30 महीनों तक गिरावट जारी रही

Great Depression के कारण

1. कृषि अत्यधिक उत्पादन (Agricultural Overproduction):

·       कृषि कीमतों में गिरावट से बदतर हुआ

·       किसानों की आय घटी

2. US विदेशी ऋण वापसी:

·       1928 की पहली छमाही में US विदेशी ऋण $1 बिलियन से अधिक थे

·       जो देश US वित्तपोषण पर बहुत निर्भर थे, उन्हें गंभीर संकट का सामना करना पड़ा

·       US ऋण की वापसी ने बाकी विश्व को प्रभावित किया

3. Stock Market संकट और बैंक विफलता:

·       Stock Market संकट ने बैंक विफलता को प्रभावित किया

·       अधिक ग्राहकों ने अपनी बचत निकाली

·       बैंक बंद हुए

4. US आयात शुल्क में वृद्धि - Smoot-Hawley Tariff 1930:

17   जून 1930 - President Herbert Hoover ने कानून पर हस्ताक्षर किए:

Smoot-Hawley Tariff Act

20,000 से अधिक आयातित सामानों पर टैरिफ बढ़ाया

  पहले से ऊंचे टैरिफ 50-100% और बढ़ाए

  इतिहास में सबसे ऊंचे स्तर

परिणाम:

·       अमेरिकी अर्थव्यवस्था की रक्षा करने का प्रयास

·       लेकिन अन्य देशों ने जवाबी टैरिफ लगाए

·       विश्व व्यापार में भारी गिरावट

5. Gold Standard की जड़ता:

·       Deflation (अपस्फीति) को उपाय माना गया

·       विस्तारवादी नीतियां नहीं अपनाई गईं

·       जर्मनी के Chancellor Heinrich Bruning ने कठोर कर्मठता दिखाई :

o   Austerity measures - कर बढ़ाए, लाभ कम किए, कीमतें और मजदूरी काटी

6. Deflation की उम्मीदें (Deflationary Expectations):

·       लोगों को लगा कीमतें और कम होंगी

·       खरीदारी टालना - कम कीमतों का फायदा उठाने के लिए

·       उधार लेने से अनिच्छुक - क्योंकि वास्तविक ब्याज दर बढ़ गई

·       खर्च घटा, मांग और गिरी - दुष्चक्र

Great Depression के प्रभाव

वैश्विक प्रभाव:

लगभग 1929 से महामंदी शुरू हुई और यह 1930s के मध्य तक चली

विनाशकारी गिरावट:
दुनिया के अधिकांश क्षेत्रों में उत्पादन, रोजगार, आय और व्यापार में भयानक गिरावट हुई

आंकड़े बोलते हैं:

मापदंड

गिरावट (1929-32)

World GDP

-15%

विश्व व्यापार (Food Stuffs)

100 59.5

विश्व व्यापार (Raw Materials)

100 70

विश्व व्यापार (Manufactures)

100 70

देशवार औद्योगिक उत्पादन:

देश

1932 में Industrial Production Index (1929=100)

USA

53 (-47%)

Germany

53 (-47%)

France

72 (-28%)

UK

84 (-16%)

USSR

183 (+83%)

नोट: USSR विश्व अर्थव्यवस्था से अलग-थलग था, इसलिए प्रभावित नहीं हुआ

बेरोजगारी (Unemployment) - सबसे बड़ा सामाजिक परिणाम:

देश

बेरोजगारी दर (%) 1930-38

USA

26.1

Germany

21.8

France

16.2

UK

15.4

अमेरिका में 25% तक बेरोजगारी

लाखों लोग बेरोजगार, गरीबी, भूख

मूल्य सूचकांक (Deflation):

देश

Wholesale Price Index 1932 (1929=100)

USA

64

Germany

76

France

79

UK

81

कौन सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ?

कृषि क्षेत्र और समुदाय सबसे खराब प्रभावित:

क्यों?

· कृषि कीमतों में गिरावट औद्योगिक वस्तुओं की कीमतों से अधिक थी

·  किसानों की आय बहुत कम हो गई

·  ग्रामीण कर्ज बढ़ा

कक्षा 10 विज्ञान | अध्याय: जैव प्रक्रम (Life Processes) 


India and the Great Depression

भारत पर प्रभाव

तत्काल प्रभाव:
भारतीय व्यापार तुरंत प्रभावित हुआ

कृषि कीमतों में भारी गिरावट:

अंतर्राष्ट्रीय कीमतें गिरीं:

भारत में भी कीमतें गिरीं

  कृषि कीमतें 50-60% गिरीं

औपनिवेशिक शोषण:

औपनिवेशिक ब्रिटिश सरकार ने अपनी राजस्व मांगों को कम करने से इनकार कर दिया

  भारी गिरावट के बावजूद कर वसूली जारी रही

किसानों की दुर्दशा:

·       वैश्विक बाजार के लिए उत्पादन करने वाले भारतीय किसानों ने महामंदी के प्रभाव की सबसे बड़ी मार झेली

विशिष्ट उदाहरण - Jute (जूट):

Gunny Bags (बोरी) निर्यात में गिरावट:

·       कच्चे जूट की कीमत में 60% गिरावट

·       जूट किसान बहुत प्रभावित हुए

ग्रामीण संकट:

Rural Indebtedness (ग्रामीण ऋणग्रस्तता) बढ़ी:

·       कीमतें गिरीं, लेकिन कर और कर्ज नहीं

किसान कर्ज के जाल में फंसे

·       भूमि खोने का खतरा

प्रवासन और सामाजिक संकट:

·       गांवों से शहरों की ओर पलायन

·       गरीबी और भुखमरी बढ़ी

शहरी भारत - अलग कहानी

उद्योगों को Tariff Protection:

·       ब्रिटिश सरकार ने उद्योगों को टैरिफ संरक्षण दिया

·       उद्योग में निवेश बढ़ाया गया

शहरी भारत में मध्यम संकट:

·       ग्रामीण भारत के विपरीत, शहरी भारत को उतना संकट नहीं हुआ

निश्चित आय वाले लोगों को लाभ:

मध्यम वर्ग वेतनभोगी कर्मचारी

  शहर में रहने वाले जमींदार

  वे बेहतर स्थिति में थे क्योंकि कीमतें कम हो रही थीं और सब कुछ अधिक किफायती हो गया

Great Depression और स्वतंत्रता आंदोलन

Civil Disobedience Movement (1930) का संबंध:

महामंदी ने ग्रामीण संकट को गहरा किया

किसान ब्रिटिश शोषण के खिलाफ और अधिक असंतुष्ट हुए

  1930 में महात्मा गांधी ने Civil Disobedience Movement शुरू किया

ग्रामीण भारत की दुर्दशा स्वतंत्रता संग्राम को मजबूत करने का कारक बनी

CHAPTER 3! The Making of a Global World – Part 1: पूर्व-आधुनिक विश्व – The Pre-Modern World. 


महामंदी की प्रतिक्रिया - Responses

USA - The New Deal (1933-1939)

President Franklin D. Roosevelt (FDR):

·       1933 में पदभार संभाला

  "The New Deal" नामक कार्यक्रमों की श्रृंखला शुरू की

New Deal के तीन R's:

1.     Relief - बेरोजगारों और गरीबों के लिए राहत

Recovery - अर्थव्यवस्था को सामान्य स्तर तक बहाल करना

  Reform - वित्तीय प्रणाली में सुधार ताकि भविष्य में ऐसा हो

प्रमुख कार्यक्रम:

1. रोजगार सृजन:

CCC (Civilian Conservation Corps):

बेरोजगार युवाओं को नौकरियां दीं

  पर्यावरण सुधार कार्य

WPA (Works Progress Administration):

हजारों बेरोजगार अमेरिकियों को नौकरियां

  निर्माण और कला परियोजनाओं में

PWA (Public Works Administration):

·       बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचा परियोजनाएं

TVA (Tennessee Valley Authority):

ग्रामीण क्षेत्रों में पहली बार बिजली लाई

  नौकरियां प्रदान कीं

2. बैंकिंग सुधार:

Glass-Steagall Act:

बैंकों को विनियमित किया

FDIC (Federal Deposit Insurance Corporation):

बैंक जमा का बीमा

  बैंक रन समाप्त हुआ

SEC (Securities and Exchange Commission):

·       शेयर बाजार का नियमन

3. सामाजिक सुरक्षा:

Social Security Act:

बुढ़ापा पेंशन

  बेरोजगारी बीमा

  आधुनिक कल्याणकारी राज्य का निर्माण

4. श्रम अधिकार:

Wagner Act:

मजदूर संघों को मान्यता

  सामूहिक सौदेबाजी का अधिकार

New Deal का प्रभाव:

आंशिक सफलता:

 1937 तक बेरोजगारी ~25% से ~14% तक गिरी

  औद्योगिक उत्पादन बढ़ा

  लेकिन पूर्ण रोजगार नहीं - केवल WWII ने ही पूर्ण रोजगार लाया

दीर्घकालिक विरासत:

बुनियादी ढांचा पुनर्निर्मित

  श्रम अधिकार स्थापित

  नियामक ढांचा बनाया जो भविष्य के अवसादों को रोकता है

  सामाजिक सुरक्षा जाल बनाया

इतिहासकारों की राय:

"New Deal ने Depression को पूरी तरह खत्म नहीं किया, लेकिन इसने क्रांति को रोका, आशा को पुनर्जीवित किया, और राज्य को अर्थव्यवस्था में केंद्रीय खिलाड़ी बनाया।"

अन्य देशों की प्रतिक्रियाएं:

Protectionism (संरक्षणवाद) का उदय:

·       व्यापार बाधाएं बढ़ीं

·       हर देश ने अपनी अर्थव्यवस्था की रक्षा का प्रयास किया

ब्रिटेन:

1. Gold Standard छोड़ना (September 1931):

·       दबाव में सितंबर 1931 में Gold Standard छोड़ा

·       Pound का Devaluation

प्रभाव:

·       ब्रिटिश निर्यात कीमतें कम हुईं

·       आयात महंगे हुए, कटे

·       कीमतों की गिरावट रुकी

·       Depression mild रहा

2. Imperial Preference (1932):

·       Ottawa Conference - Commonwealth देशों से समझौता

·       ब्रिटिश सामानों को आयात वरीयताएं बढ़ाईं

·       Australia, Canada, South Africa, New Zealand में ब्रिटेन का हिस्सा बढ़ा

जर्मनी:

·       Heinrich Bruning की कठोर Austerity

·       बाद में expansionary policies

·       Depression से लड़ने में सफल

फ्रांस:

·       1936 में Gold Standard छोड़ा

कक्षा 10 विज्ञान | अध्याय 4: कार्बन एवं उसके यौगिक (Carbon and Its Compounds). 


द्वितीय विश्व युद्ध के बाद - नई अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक व्यवस्था

Bretton Woods Conference (जुलाई 1944)

स्थान: Bretton Woods, New Hampshire, USA

उद्देश्य:

 WWII के बाद नई अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक व्यवस्था की योजना बनाना

 1930s की गलतियों से सीखना

  स्थिरता और सहयोग सुनिश्चित करना

सहभागी:

·       44 संबद्ध राष्ट्र

·       प्रमुख अर्थशास्त्री शामिल

नई संस्थाओं का निर्माण:

1. IMF (International Monetary Fund) - अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष

स्थापना: 1944 (Bretton Woods में)
परिचालन शुरू: 1945

उद्देश्य:

मुद्रा स्थिरता को बढ़ावा देना

विनिमय दर को स्थिर रखना

  अल्पकालिक BOP संकट में सदस्यों की मदद करना

कैसे काम करता है:

सदस्य देश quota जमा करते हैं

  संकट में ऋण प्राप्त कर सकते हैं

2. World Bank (विश्व बैंक)

पूरा नाम: International Bank for Reconstruction and Development (IBRD)

स्थापना: 1944 (Bretton Woods में)

उद्देश्य:

पुनर्निर्माण - युद्ध-विध्वस्त यूरोप का

  विकास - विकासशील देशों का

दीर्घकालिक परियोजनाओं के लिए ऋण

Bretton Woods System की विशेषताएं:

1. Fixed Exchange Rate System (निश्चित विनिमय दर):

सोने से जुड़ा Dollar:

US Dollar को Gold से जोड़ा गया - $35 प्रति औंस

  अन्य सभी मुद्राओं को Dollar से जोड़ा गया

  Fixed but adjustable विनिमय दरें

उद्देश्य:

मुद्रा अस्थिरता से बचना

  1930s के प्रतिस्पर्धी अवमूल्यन से बचना

2. Free Trade को बढ़ावा:

व्यापार बाधाओं को कम करना

  Protectionism से दूर

3. अंतर्राष्ट्रीय सहयोग:

·       पहली बार वैश्विक आर्थिक संस्थाएं

समन्वित नीति निर्माण

Bretton Woods System का महत्व:

तत्काल प्रभाव (1945-1970s):

युद्ध के बाद यूरोप और जापान का पुनर्निर्माण

  1950s-60s में अभूतपूर्व विकास

व्यापार तेजी से बढ़ा

  मुद्रा स्थिरता

दीर्घकालिक विरासत:

IMF और World Bank आज भी सक्रिय

  वैश्विक आर्थिक शासन की नींव

अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सहयोग का मॉडल

1971 में समाप्त:

 US President Richard Nixon ने Dollar-Gold convertibility समाप्त की

  लेकिन IMF और World Bank जारी रहे

History CHAPTER 2 COMPLETE! Part 4 = सामूहिक अपनेपन की भावना 


📝 MCQs (PYQ)

प्रश्न 1. प्रथम विश्व युद्ध के बाद कौन सा देश सबसे बड़ा वैश्विक लेनदार बना?

(a) ब्रिटेन
(b)
फ्रांस
(c) USA (
अमेरिका)
(d)
जर्मनी

उत्तर: (c) USA (अमेरिका)

व्याख्या: प्रथम विश्व युद्ध ने अमेरिका को वैश्विक ऋणदाता से वैश्विक लेनदार में बदल दिया

प्रश्न 2. ब्रिटेन ने Gold Standard पर किस वर्ष वापसी की?

(a) 1920
(b) 1925
(c) 1929
(d) 1931

उत्तर: (b) 1925

व्याख्या: Winston Churchill (वित्त मंत्री) ने 1925 में युद्ध-पूर्व समानता पर Gold Standard पर वापसी की, जिसे John Maynard Keynes ने "मूर्खतापूर्ण" कहा

प्रश्न 3. Wall Street Crash (Black Tuesday) किस तारीख को हुआ?

(a) 24 अक्टूबर 1929
(b) 29
अक्टूबर 1929
(c) 3
नवंबर 1929
(d) 15
दिसंबर 1929

उत्तर: (b) 29 अक्टूबर 1929

व्याख्या: 29 अक्टूबर 1929 को "Black Tuesday" के रूप में जाना जाता है जब stock market crash हुआ और लगभग $14 billion का stock value खो गया

प्रश्न 4. Great Depression के दौरान World GDP में लगभग कितनी गिरावट आई?

(a) -5%
(b) -10%
(c) -15%
(d) -25%

उत्तर: (c) -15%

व्याख्या: 1929-1932 के बीच World GDP में लगभग 15% की गिरावट आई

 

प्रश्न 5. Great Depression के दौरान USA में बेरोजगारी दर कितनी पहुंच गई?

(a) 10%
(b) 15%
(c) 20%
(d) 26%

उत्तर: (d) 26%

व्याख्या: महामंदी के दौरान अमेरिका में बेरोजगारी दर 26.1% तक पहुंच गई थी

 

प्रश्न 6. भारत में Great Depression के दौरान कृषि कीमतों में लगभग कितनी गिरावट आई?

(a) 20-30%
(b) 30-40%
(c) 50-60%
(d) 70-80%

उत्तर: (c) 50-60%

व्याख्या: भारत में कृषि कीमतें 50-60% तक गिर गईं, जिससे ग्रामीण संकट गहरा हो गया

प्रश्न 7. Assembly Line System का उपयोग करके Mass Production किसने शुरू किया?

(a) Thomas Edison
(b) Henry Ford
(c) Andrew Carnegie
(d) John Rockefeller

उत्तर: (b) Henry Ford

व्याख्या: Henry Ford ने Assembly Line System का उपयोग करके T-Model Ford - दुनिया की पहली बड़े पैमाने पर उत्पादित कार बनाई

प्रश्न 8. ब्रिटेन ने Gold Standard को किस वर्ष छोड़ा?

(a) 1929
(b) 1930
(c) 1931
(d) 1932

उत्तर: (c) 1931

व्याख्या: ब्रिटेन ने सितंबर 1931 में दबाव में Gold Standard छोड़ा, जिससे Pound का devaluation हुआ

 

प्रश्न 9. Bretton Woods Conference किस वर्ष हुआ?

(a) 1942
(b) 1943
(c) 1944
(d) 1945

उत्तर: (c) 1944

व्याख्या: जुलाई 1944 में Bretton Woods, New Hampshire, USA में conference हुआ जिसमें IMF और World Bank की स्थापना हुई .

प्रश्न 10. किस President ने USA में New Deal कार्यक्रम शुरू किया?

(a) Herbert Hoover
(b) Franklin D. Roosevelt
(c) Woodrow Wilson
(d) Harry Truman

उत्तर: (b) Franklin D. Roosevelt

व्याख्या: Franklin D. Roosevelt ने 1933 में पदभार संभाला और "The New Deal" नामक कार्यक्रमों की श्रृंखला शुरू की

कक्षा 10 विज्ञान अध्याय 3: धातु एवं अधातु | Complete Notes.


Short Answer

प्रश्न 1. Gold Standard क्या था? इसकी मुख्य समस्याएं बताइए। (CBSE 2020)

उत्तर:

Gold Standard की परिभाषा:

Gold Standard एक मौद्रिक प्रणाली थी जिसमें :

·       व्यक्तियों और देशों के बीच सोने का मुक्त प्रवाह संभव था

·       राष्ट्रीय मुद्राओं का मूल्य सोने के संदर्भ में निश्चित था

·       प्रत्येक देश की मुद्रा का एक fixed gold value होता था

मुख्य समस्याएं:

1. Balance of Payment (BOP) घाटा:

·       BOP घाटा वाले देशों से सोना बाहर चला जाता था

·       मुद्रा की आपूर्ति घट जाती थी

2. Deflation की मजबूरी:

·       मुद्रा का मूल्य बनाए रखने के लिए deflation (अपस्फीति) करना पड़ता था

·       घरेलू कीमतें कम करनी पड़ती थीं

·       आर्थिक गतिविधि धीमी हो जाती थी

3. Devaluation का विकल्प नहीं:

·       देश अपनी मुद्रा का devaluation (अवमूल्यन) नहीं कर सकते थे

·       आर्थिक समस्याओं से निपटने में कठिनाई

4. अंतर्राष्ट्रीय समन्वय की कमी:

·       समन्वय संगठन की अनुपस्थिति

·       हर देश अपनी समस्याओं से अकेले निपटता था

निष्कर्ष:
इन समस्याओं के कारण Great Depression के दौरान अधिकांश देशों ने Gold Standard छोड़ दिया


प्रश्न 2. Great Depression के मुख्य कारण क्या थे? (CBSE 2019, 2018)

उत्तर:

Great Depression (1929-1930s) के प्रमुख कारण:

1. कृषि अत्यधिक उत्पादन (Agricultural Overproduction):

·       कृषि कीमतों में गिरावट हो रही थी

·       पूर्वी यूरोप में गेहूं उत्पादन फिर से शुरू हुआ

·       किसानों की आय घटी, खरीदारी क्षमता कम हुई

2. US विदेशी ऋण की वापसी:

·       1928 में US ने विदेशी ऋण देना बंद किया

·       जो देश US वित्तपोषण पर बहुत निर्भर थे, उन्हें गंभीर संकट का सामना करना पड़ा

·       यूरोपीय अर्थव्यवस्थाएं प्रभावित हुईं

3. Stock Market Crash (1929):

·       29 अक्टूबर 1929 को Wall Street Crash

$14 billion का stock value खो गया

·      

·       निवेशकों का विश्वास टूट गया

4. Bank Failures (बैंक विफलता):

·       Stock Market संकट ने बैंक विफलता को प्रभावित किया

·       ग्राहकों ने अपनी बचत निकाली, बैंक बंद हुए

·       क्रेडिट की उपलब्धता समाप्त हो गई

5. Protectionism - Smoot-Hawley Tariff (1930):

·       USA ने 20,000+ आयातित सामानों पर टैरिफ बढ़ाया

  अन्य देशों ने जवाबी टैरिफ लगाए

  विश्व व्यापार में 60-70% गिरावट

6. Deflationary Expectations:

·       लोगों को लगा कीमतें और कम होंगी

·       खरीदारी टालना और खर्च घटना

·       मांग और गिरी - दुष्चक्र शुरू हुआ

प्रश्न 3. भारत पर Great Depression के प्रभाव का वर्णन करें। (CBSE 2020, 2017)

उत्तर:

भारत पर Great Depression के प्रभाव:

A. ग्रामीण भारत - सबसे ज्यादा प्रभावित:

1. कृषि कीमतों में भारी गिरावट:

·       भारत में कृषि कीमतें 50-60% गिर गईं

·       अंतर्राष्ट्रीय बाजार की कीमतें घटने से भारत भी प्रभावित

·       किसानों की आय बहुत कम हो गई

2. औपनिवेशिक शोषण:

·       औपनिवेशिक ब्रिटिश सरकार ने राजस्व मांगों को कम करने से इनकार कर दिया

·       भारी गिरावट के बावजूद कर वसूली जारी रही

·       किसान दोहरी मार झेल रहे थे

3. ग्रामीण ऋणग्रस्तता (Rural Indebtedness):

·       कीमतें गिरीं, लेकिन कर और कर्ज की मांग नहीं

किसान कर्ज के जाल में फंसे

·       भूमि खोने का खतरा बढ़ा

4. विशिष्ट उदाहरण - Jute:

·       कच्चे जूट की कीमत में 60% गिरावट

·       बंगाल के जूट किसान बहुत प्रभावित हुए

B. शहरी भारत - कम प्रभावित:

1. उद्योगों को संरक्षण:

·       ब्रिटिश सरकार ने उद्योगों को टैरिफ संरक्षण दिया

·       उद्योग में निवेश बढ़ाया गया

2. निश्चित आय वाले लोगों को लाभ:

·       मध्यम वर्ग वेतनभोगी कर्मचारी और शहर में रहने वाले जमींदार

·       कीमतें कम हो रही थीं, सब कुछ किफायती हो गया

C. स्वतंत्रता आंदोलन से संबंध:

·       महामंदी ने ग्रामीण संकट को गहरा किया

  किसान ब्रिटिश शोषण के खिलाफ असंतुष्ट हुए

  1930 में Civil Disobedience Movement को बल मिला

प्रश्न 4. USA के New Deal कार्यक्रम की व्याख्या करें। (CBSE 2019)

उत्तर:

New Deal (1933-1939) - President Franklin D. Roosevelt:

परिचय:
1933
में FDR ने पदभार संभाला और Great Depression से लड़ने के लिए "The New Deal" नामक कार्यक्रमों की श्रृंखला शुरू की

New Deal के तीन R's:

1.     Relief - बेरोजगारों और गरीबों के लिए राहत

  Recovery - अर्थव्यवस्था को सामान्य स्तर तक बहाल करना

  Reform - वित्तीय प्रणाली में सुधार

प्रमुख कार्यक्रम:

1. रोजगार सृजन:

CCC (Civilian Conservation Corps): बेरोजगार युवाओं को पर्यावरण सुधार में नौकरियां

  WPA (Works Progress Administration): निर्माण और कला परियोजनाओं में रोजगार

  TVA (Tennessee Valley Authority): ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली और नौकरियां

2. बैंकिंग सुधार:

·       FDIC: बैंक जमा का बीमा, बैंक रन समाप्त

·       बैंकों को विनियमित किया गया

3. सामाजिक सुरक्षा:

·       Social Security Act: बुढ़ापा पेंशन, बेरोजगारी बीमा

  आधुनिक कल्याणकारी राज्य का निर्माण

4. श्रम अधिकार:

·       मजदूर संघों को मान्यता, सामूहिक सौदेबाजी का अधिकार

प्रभाव:

·       1937 तक बेरोजगारी ~25% से ~14% तक गिरी

  पूर्ण रोजगार नहीं आया (केवल WWII ने दिया)

  लेकिन आशा पुनर्जीवित हुई और राज्य को अर्थव्यवस्था में केंद्रीय भूमिका दी

प्रश्न 5. Bretton Woods Conference (1944) का महत्व समझाइए। (CBSE 2018)

उत्तर:

Bretton Woods Conference - जुलाई 1944:

पृष्ठभूमि:
द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान, 44 संबद्ध राष्ट्रों ने Bretton Woods, New Hampshire, USA में मुलाकात की

उद्देश्य:

·       WWII के बाद नई अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक व्यवस्था की योजना बनाना

1930s की गलतियों (protectionism, competitive devaluation) से सीखना

  स्थिरता और सहयोग सुनिश्चित करना

मुख्य निर्णय:

1. IMF (International Monetary Fund) की स्थापना:

·       उद्देश्य: मुद्रा स्थिरता, विनिमय दर स्थिरीकरण

BOP संकट में सदस्यों को अल्पकालिक ऋण

2. World Bank की स्थापना:

·       उद्देश्य: युद्ध-विध्वस्त यूरोप का पुनर्निर्माण, विकासशील देशों का विकास

दीर्घकालिक परियोजनाओं के लिए ऋण

3. Fixed Exchange Rate System:

·       US Dollar को Gold से जोड़ा गया ($35/औंस)

  अन्य मुद्राओं को Dollar से जोड़ा गया

  Fixed but adjustable rates

महत्व:

1. तत्काल प्रभाव:

·       युद्ध के बाद यूरोप और जापान का पुनर्निर्माण

  1950s-60s में अभूतपूर्ण विकास

  मुद्रा स्थिरता

2. दीर्घकालिक विरासत:

·       IMF और World Bank आज भी सक्रिय

  वैश्विक आर्थिक शासन की नींव

अंतर्राष्ट्रीय सहयोग का मॉडल

निष्कर्ष:
Bretton Woods
ने आधुनिक अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक व्यवस्था की नींव रखी

Class 10 Science chapter: “अम्ल, क्षारक एवं लवण (Acids, Bases and Salts)”


Long Answer

प्रश्न 1. Great Depression के कारणों और प्रभावों का विस्तार से वर्णन करेंभारत पर इसके प्रभाव को भी शामिल करें। (CBSE 2020, 2019)

उत्तर:

Great Depression (महामंदी) 1929-1930s:

Great Depression 20वीं सदी की सबसे बड़ी आर्थिक मंदी थी जो लगभग 1929 से शुरू हुई और 1930s के मध्य तक चली

भाग A: Great Depression के कारण

1. कृषि अत्यधिक उत्पादन (Agricultural Overproduction):

·       पूर्वी यूरोप में गेहूं उत्पादन फिर से शुरू हुआ

·       अत्यधिक उत्पादन (Overproduction) से अनाज की कीमतें घटीं

·       ग्रामीण आय घटी, किसान कर्ज बढ़ा

·       खरीदारी क्षमता कम हुई

2. US विदेशी ऋण की वापसी:

·       1923-1928 में USA ने बाकी विश्व में पूंजी निर्यात किया था

·       1928 की पहली छमाही में US विदेशी ऋण $1 बिलियन से अधिक थे

·       अचानक ऋण देना बंद कर दिया

·       जो देश US वित्तपोषण पर निर्भर थे, उन्हें गंभीर संकट का सामना करना पड़ा

·       यूरोपीय अर्थव्यवस्थाएं डगमगा गईं

3. Wall Street Crash (29 October 1929):

Black Tuesday - 29 अक्टूबर 1929

New York Stock Exchange पर लगभग 16 मिलियन शेयर एक दिन में ट्रेड किए गए

  लगभग $14 बिलियन का stock मूल्य खो गया

  हजारों निवेशकों का सफाया

  Dow Jones: 381 से गिरकर 230 (8 हफ्तों में 40% गिरावट)

4. Bank Failures और Credit Crunch:

·       Stock Market संकट ने बैंक विफलता को प्रभावित किया

·       अधिक ग्राहकों ने अपनी बचत निकाली

·       बैंक बंद हुए

·       क्रेडिट की उपलब्धता समाप्त, व्यवसाय प्रभावित

5. Protectionism - Smoot-Hawley Tariff Act (1930):

 17 जून 1930 को President Hoover ने कानून पर हस्ताक्षर किए

20,000+ आयातित सामानों पर टैरिफ बढ़ाया  

  टैरिफ 50-100% और बढ़ाए - इतिहास में सबसे ऊंचे

·       अन्य देशों ने जवाबी टैरिफ लगाए

·       विश्व व्यापार में भारी गिरावट

6. Gold Standard की जड़ता:

·       देशों ने deflation (अपस्फीति) को उपाय माना

·       विस्तारवादी नीतियां नहीं अपनाई गईं

·       जर्मनी के Chancellor ने कठोर austerity - कर बढ़ाए, मजदूरी काटी

7. Deflationary Expectations:

·       लोगों को लगा कीमतें और कम होंगी

·       खरीदारी टालना - कम कीमतों का इंतजार

·       उधार लेने से अनिच्छुक

·       खर्च घटा, मांग और गिरी - दुष्चक्र

भाग B: Great Depression के वैश्विक प्रभाव

1. विनाशकारी आर्थिक गिरावट:

दुनिया के अधिकांश क्षेत्रों में उत्पादन, रोजगार, आय और व्यापार में भयानक गिरावट हुई

प्रमुख आंकड़े:

मापदंड

गिरावट (1929-32)

World GDP

-15%

World Trade (Total)

-60 to -70%

US Industrial Production

-47%

Germany Industrial Production

-47%

 

2. बेरोजगारी - सबसे बड़ा सामाजिक परिणाम:

देश

बेरोजगारी दर (%)

USA

26.1

Germany

21.8

France

16.2

UK

15.4

अमेरिका में 25% तक बेरोजगारी - यानी हर चौथा व्यक्ति बेरोजगार

लाखों लोग बेरोजगार, गरीबी, भूख की रेखा पर

3. Deflation (मूल्य गिरावट):

देश

Wholesale Price Index 1932 (1929=100)

USA

64

Germany

76

France

79

UK

81

·       कीमतें 20-36% तक गिर गईं

·       लेकिन आय और भी ज्यादा गिरी

भाग C: भारत पर प्रभाव

A. ग्रामीण भारत - विनाशकारी प्रभाव:

1. कृषि कीमतों में भारी गिरावट:

भारत में कृषि कीमतें 50-60% गिर गईं

  अंतर्राष्ट्रीय बाजार की गिरावट का सीधा असर

  विशेष रूप से निर्यात फसलें प्रभावित:

·       Jute (जूट): 60% गिरावट

o   Cotton (कपास), Tea (चाय), Wheat (गेहूं)

2. औपनिवेशिक शोषण जारी:

·       ब्रिटिश सरकार ने राजस्व मांगों को कम करने से इनकार

·       भारी गिरावट के बावजूद कर वसूली जारी

·       भू-राजस्व, नमक कर, अन्य कर नहीं घटे

·       किसान दोहरी मार - कम आय, उच्च कर

3. ग्रामीण ऋणग्रस्तता (Rural Indebtedness) बढ़ी:

·       कीमतें गिरीं, लेकिन कर्ज की मांग नहीं

किसान कर्ज के जाल में फंसे

·       साहूकारों से और कर्ज

·       भूमि खोने का खतरा बढ़ा

·       गरीबी और भुखमरी में वृद्धि

4. सबसे ज्यादा प्रभावित:

·       वैश्विक बाजार के लिए उत्पादन करने वाले भारतीय किसान सबसे ज्यादा प्रभावित

·       बंगाल के जूट किसान

·       पंजाब के गेहूं किसान

·       महाराष्ट्र, गुजरात के कपास किसान

B. शहरी भारत - कम प्रभावित:

1. उद्योगों को संरक्षण:

·       ब्रिटिश सरकार ने उद्योगों को टैरिफ संरक्षण दिया

·       उद्योग में निवेश बढ़ाया गया

·       घरेलू उद्योग को लाभ

2. निश्चित आय वालों को फायदा:

मध्यम वर्ग वेतनभोगी कर्मचारी

  शहर में रहने वाले जमींदार

  कीमतें कम हो रही थीं, सब कुछ अधिक किफायती

·       वास्तविक आय बढ़ी (real income increased)

C. स्वतंत्रता आंदोलन से संबंध:

1. Civil Disobedience Movement (1930):

महामंदी ने ग्रामीण संकट को गहरा किया

किसान ब्रिटिश शोषण के खिलाफ और अधिक असंतुष्ट

 

  1930 में महात्मा गांधी ने Civil Disobedience Movement शुरू किया

ग्रामीण भारत की दुर्दशा स्वतंत्रता संग्राम को मजबूत करने का कारक

2. राष्ट्रवाद का विकास:

·       आर्थिक शोषण की समझ बढ़ी

·       औपनिवेशिक नीतियों की आलोचना तेज हुई

निष्कर्ष:

Great Depression ने पूरी दुनिया को हिला दिया - World GDP -15%, US बेरोजगारी 26%, World trade -60-70% । भारत में ग्रामीण संकट सबसे गहरा था - कृषि कीमतें 50-60% गिरीं, लेकिन ब्रिटिश कर वसूली जारी रहीइस संकट ने दिखाया कि वैश्विक अर्थव्यवस्था कितनी परस्पर जुड़ी है और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग कितना जरूरी है

प्रश्न 2. 1925 में ब्रिटेन की Gold Standard पर वापसी के निर्णय के क्या परिणाम हुए? इस निर्णय की आलोचना क्यों हुई? (CBSE 2018, 2017)

उत्तर:

ब्रिटेन और Gold Standard (1925-1931):

पृष्ठभूमि:

प्रथम विश्व युद्ध (1914-1918) के दौरान ब्रिटेन ने Gold Standard छोड़ दिया थायुद्ध के बाद, ब्रिटेन की आर्थिक स्थिति कमजोर थी:

·       विशाल बाह्य कर्ज

·       जापान और भारत से प्रतिस्पर्धा

·       उत्पादन घटा, बेरोजगारी बढ़ी

भाग A: 1925 का निर्णय

Winston Churchill का निर्णय:

·       1925 में Winston Churchill (वित्त मंत्री) ने युद्ध-पूर्व समानता पर Gold Standard पर वापसी का निर्णय लिया

·       उद्देश्य: ब्रिटिश Pound की प्रतिष्ठा बहाल करना

·       लंदन को फिर से वैश्विक वित्तीय केंद्र बनाना

John Maynard Keynes का विरोध:

·       प्रसिद्ध Economist John Maynard Keynes ने इस निर्णय का तीव्र विरोध किया

·       Keynes ने पूछा: Churchill ने "ऐसी मूर्खतापूर्ण बात क्यों की?"

·       चेतावनी दी कि Pound overvalued (अधिमूल्यित) हो जाएगा

·       लेकिन सुना नहीं गया

भाग B: Overvalued Pound के परिणाम

1. आयात सस्ता, घरेलू उद्योग प्रभावित:

·       Pound overvalued होने से आयात अपेक्षाकृत सस्ता हो गया

·       विदेशी सामान सस्ते में उपलब्ध

·       ब्रिटिश उत्पादकों को विदेशी प्रतिस्पर्धा से नुकसान

·       नए उद्योगों के विकास में बाधा

·       घरेलू उत्पादन प्रभावित

2. निर्यात महंगा और प्रतिस्पर्धाहीन:

·       निर्यात महंगे हो गए

·       अंतर्राष्ट्रीय बाजार में ब्रिटिश सामान अप्रतिस्पर्धी

·       विश्व व्यापार में ब्रिटिश निर्यात का हिस्सा गिर रहा था

·       1925 के बाद निर्यात की मात्रा भी घटी

3. विशिष्ट उद्योगों पर प्रभाव:

A. Coal (कोयला) उद्योग:

·       अन्य जगहों पर खदानें खोली गईं

·       जल शक्ति (Hydro-power) के विकास से प्रतिस्पर्धा

·       ब्रिटिश कोयला निर्यात घटा

B. Cotton (कपास) उद्योग:

·       भारतीय घरेलू उत्पादन बढ़ा

·       सुदूर पूर्व में जापानी प्रतिस्पर्धा

·       Lancashire के कपड़ा मिलें संकट में

C. Iron, Steel, Shipbuilding:

·       युद्धकाल के अत्यधिक विस्तार से पीड़ित

·       युद्ध के बाद मांग घटी

·       Overvalued pound ने समस्या बढ़ाई

4. बेरोजगारी में भारी वृद्धि:

तुलनात्मक बेरोजगारी दर (1925-29):


 

 

देश

बेरोजगारी दर (%)

 

USA

7.9

 

France

3.8

 

Germany

9.2

 

UK

12.0




·       ब्रिटेन में 12% बेरोजगारी - सबसे ज्यादा

·       निर्यात-आधारित उद्योगों में बेरोजगारी सबसे ज्यादा

·       सामाजिक संकट

5. General Strike 1926 (आम हड़ताल):

·       4-13 मई 1926

·       खनन उद्योग में मजदूरी कटौती के प्रयास से शुरू

·       खदान मालिकों ने "lockout" किया

·       अन्य मजदूरों ने एकजुटता में general strike (आम हड़ताल) की

·       9 दिनों तक देश लगभग ठप

·       13 दिनों के बाद Trade Union Council ने हड़ताल वापस ली

·       लेकिन खनिकों की हड़ताल और चली

भाग C: आलोचना के कारण

1. गलत Valuation:

·       युद्ध-पूर्व parity पर वापसी का मतलब Pound को overvalue करना था

·       ब्रिटेन की आर्थिक स्थिति युद्ध-पूर्व से कमजोर थी

·       लेकिन मुद्रा मूल्य उसी स्तर पर रखा गया

2. Deflationary Pressure:

·       Gold Standard maintain करने के लिए deflation (अपस्फीति) करना पड़ा

·       घरेलू कीमतें कम करनी पड़ीं

·       मजदूरी काटनी पड़ी

·       आर्थिक गतिविधि धीमी हुई

3. प्रतिस्पर्धाहीनता:

·       ब्रिटिश सामान अंतर्राष्ट्रीय बाजार में बहुत महंगे हो गए

·       निर्यात घटा, रोजगार घटा

4. Flexibility की कमी:

·       Gold Standard में devaluation (अवमूल्यन) का विकल्प नहीं

·       आर्थिक समस्याओं से निपटने में कठिनाई

·       Monetary policy पर constraint

5. सामाजिक परिणाम:

·       बेरोजगारी बढ़ी, गरीबी बढ़ी

·       General Strike 1926 - सामाजिक अशांति

·       मजदूर वर्ग का जीवन स्तर घटा

भाग D: अंतिम परिणाम - 1931 में छोड़ना

September 1931 - Gold Standard छोड़ा:

·       Great Depression के दबाव में सितंबर 1931 में Gold Standard छोड़ना पड़ा

·       Pound का Devaluation हुआ

Devaluation के लाभ:

·       ब्रिटिश निर्यात कीमतें कम हुईं

·       आयात महंगे हुए, घरेलू उद्योग को राहत

·       कीमतों की गिरावट रुकी

·       Depression mild रहा (अन्य देशों की तुलना में)

·       आर्थिक पुनर्प्राप्ति शुरू हुई

सबक:

·       Keynes सही साबित हुए

·       1925 का निर्णय वास्तव में "मूर्खतापूर्ण" था

·       Rigid exchange rates से flexibility बेहतर है

·       आर्थिक वास्तविकताओं को ignore नहीं किया जा सकता

निष्कर्ष:

ब्रिटेन की 1925 में Gold Standard पर वापसी एक आर्थिक नीति की विफलता का उदाहरण हैइसने Pound को overvalue किया, निर्यात महंगे बनाए, निर्यात-आधारित उद्योगों को नुकसान पहुंचाया, बेरोजगारी बढ़ाई (12%), और General Strike 1926 को जन्म दिया । John Maynard Keynes की चेतावनियां सही साबित हुईंअंततः 1931 में Gold Standard छोड़ना पड़ा, जिसके बाद आर्थिक स्थिति में सुधार आयायह उदाहरण दिखाता है कि आर्थिक नीतियां प्रतीक (Pound की प्रतिष्ठा) की बजाय वास्तविकताओं पर आधारित होनी चाहिए

प्रश्न 3. Bretton Woods Conference (1944) की पृष्ठभूमि, मुख्य निर्णयों और महत्व का विस्तार से वर्णन करें। (CBSE 2020, 2019, 2016)

उत्तर:

Bretton Woods Conference (1944) - नई अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक व्यवस्था का जन्म:

भाग A: पृष्ठभूमि (Background)

1. 1930s के Great Depression का सबक:

·       Great Depression (1929-1930s) ने दिखाया कि uncoordinated policies विनाशकारी हैं

·       Protectionism: Smoot-Hawley Tariff (1930) और जवाबी टैरिफ ने trade 60-70% घटाया

  Competitive Devaluation: देशों ने अपनी मुद्राओं का devaluation किया, "race to the bottom"

  Gold Standard की विफलता: Deflation और economic hardship

  परिणाम: World GDP -15%, unemployment 25%, widespread poverty

2. द्वितीय विश्व युद्ध (1939-1945):

·       एक और विनाशकारी युद्ध

·       यूरोप और जापान बर्बाद

·       पुनर्निर्माण की जरूरत

·       आर्थिक अराजकता से बचने की आवश्यकता

3. USA का उदय:

·       USA सबसे शक्तिशाली अर्थव्यवस्था

·       सबसे बड़ा लेनदार राष्ट्र

·       नई व्यवस्था में leadership लेने की स्थिति में

4. सहयोग की आवश्यकता:

 1930s की गलतियां दोहराने की इच्छा

  अंतर्राष्ट्रीय सहयोग जरूरी

  Stability और prosperity सुनिश्चित करने का लक्ष्य

भाग B: Bretton Woods Conference (जुलाई 1944)

स्थान और समय:

स्थान: Bretton Woods, New Hampshire, USA

  समय: जुलाई 1944 (WWII अभी चल रहा था)

सहभागी:

·       44 संबद्ध राष्ट्र (Allied Nations)

·       प्रमुख अर्थशास्त्री शामिल

·       USA का नेतृत्व

उद्देश्य:

नई अंतर्राष्ट्रीय मौद्रिक और वित्तीय व्यवस्था बनाना

  युद्ध के बाद पुनर्निर्माण और विकास के लिए framework

मुद्रा स्थिरता सुनिश्चित करना

  Free trade को बढ़ावा देना

भाग C: मुख्य निर्णय (Main Decisions)

1. IMF (International Monetary Fund) की स्थापना:

स्थापना:

 1944 में Bretton Woods में निर्णय

 1945 में परिचालन शुरू

 Headquarters: Washington D.C., USA

उद्देश्य:

·       मुद्रा स्थिरता (Currency Stability) को बढ़ावा देना

विनिमय दर (Exchange Rates) को स्थिर रखना

 Balance of Payment (BOP) संकट में सदस्य देशों की मदद करना

  अल्पकालिक वित्तीय सहायता प्रदान करना

कैसे काम करता है:

·       Quota System: सदस्य देश अपनी आर्थिक शक्ति के अनुसार quota जमा करते हैं

  संकट में ऋण प्राप्त कर सकते हैं

 Quota के अनुसार voting power

2. World Bank की स्थापना:

पूरा नाम:
International Bank for Reconstruction and Development (IBRD)

स्थापना:

 1944 में Bretton Woods में निर्णय

 1945 में परिचालन शुरू

 Headquarters: Washington D.C., USA

उद्देश्य:

·       Reconstruction (पुनर्निर्माण): युद्ध-विध्वस्त यूरोप और जापान का

  Development (विकास): विकासशील देशों का आर्थिक विकास

दीर्घकालिक परियोजनाओं के लिए ऋण

  बुनियादी ढांचा, शिक्षा, स्वास्थ्य परियोजनाओं को वित्त

3. Fixed Exchange Rate System (निश्चित विनिमय दर प्रणाली):

Dollar-Gold Link:

·       US Dollar को Gold से जोड़ा गया - $35 प्रति औंस सोना

·       USA ने प्रतिबद्धता दी कि वह $35 पर सोना खरीदेगा/बेचेगा

Other Currencies-Dollar Link:

·       अन्य सभी मुद्राओं को Dollar से जोड़ा गया

·       प्रत्येक देश ने अपनी मुद्रा का Dollar में par value निर्धारित किया

·       Example: 1 Pound Sterling = $4.03

Fixed but Adjustable:

·       विनिमय दरें fixed लेकिन adjustable

·       ±1% के भीतर fluctuation की अनुमति

·       "Fundamental disequilibrium" की स्थिति में बदलाव संभव

उद्देश्य:

मुद्रा अस्थिरता से बचना

  1930s के प्रतिस्पर्धी devaluation से बचना

·       व्यापार और निवेश में predictability

·       लेकिन पूर्ण rigidity नहीं

4. Capital Controls की अनुमति:

·       देशों को cross-border capital flows को नियंत्रित करने की अनुमति

·       Speculative capital movements से बचने के लिए

·       Domestic policy autonomy बनाए रखना

5. Free Trade को बढ़ावा:

व्यापार बाधाओं को कम करना

  Protectionism से दूर, multilateral trade की ओर

बाद में GATT (1947) की स्थापना

भाग D: Bretton Woods System का महत्व

1. तत्काल प्रभाव (1945-1970s):

A. युद्ध के बाद पुनर्निर्माण:

Marshall Plan के साथ मिलकर यूरोप का पुनर्निर्माण

  जापान का पुनर्निर्माण

  World Bank ने दीर्घकालिक वित्त प्रदान किया

B. "Golden Age" of Growth:

1950s-1960s में अभूतपूर्ण आर्थिक विकास

  Developed countries में तेज growth

  व्यापार तेजी से बढ़ा

·       जीवन स्तर में सुधार

C. मुद्रा स्थिरता:

·       Exchange rates स्थिर रहीं

·       Trade और investment में predictability

·       1930s जैसी currency chaos नहीं

D. विकासशील देशों को सहायता:

·       World Bank ने विकास परियोजनाओं को वित्त दिया

·       IMF ने BOP संकट में मदद की

2. दीर्घकालिक विरासत:

A. संस्थागत Framework:

·       IMF और World Bank आज भी सक्रिय और महत्वपूर्ण

·       190+ सदस्य देश

·       Global financial safety net

B. वैश्विक आर्थिक शासन:

·       International economic governance की नींव

  Multilateral approach की शुरुआत

  देशों के बीच economic cooperation का platform

C. Crisis Management:

·       IMF - financial crises में मदद करता है

·       1990s Asian Crisis, 2008 Global Financial Crisis में भूमिका

·       COVID-19 pandemic में भी active

D. Development Finance:

·       World Bank - विश्व का सबसे बड़ा development finance institution

·       गरीबी कम करने, बुनियादी ढांचा बनाने में योगदान

3. Bretton Woods System का अंत (1971):

Nixon Shock (15 August 1971):

·       US President Richard Nixon ने Dollar-Gold convertibility समाप्त की

·       Dollar के लिए सोना देने से इनकार

·       कारण: US gold reserves घट रहे थे, Vietnam War खर्च

परिणाम:

·       Fixed exchange rate system समाप्त

·       Floating exchange rates की शुरुआत

·       लेकिन IMF और World Bank जारी रहे

4. आज की प्रासंगिकता:

A. 2008 Global Financial Crisis:

·       Bretton Woods institutions ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई

·       IMF ने कई देशों को rescue packages दिए

·       Coordination platform प्रदान किया

B. COVID-19 Pandemic:

·       IMF और World Bank ने emergency financing दी

·       विकासशील देशों को सहायता

C. Reform की मांग:

·       Emerging economies (China, India) अधिक representation चाहते हैं

·       Governance structure में सुधार की बहस

·       लेकिन मूल framework आज भी relevant

 

निष्कर्ष:

Bretton Woods Conference (1944) एक ऐतिहासिक मोड़ था जिसने आधुनिक अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक व्यवस्था की नींव रखी । IMF और World Bank की स्थापना, fixed exchange rate system, और international cooperation के सिद्धांतों ने 1930s की गलतियों से सीखते हुए एक नई शुरुआत कीहालांकि 1971 में fixed exchange rate system समाप्त हो गया, लेकिन इन संस्थाओं का महत्व आज भी बना हुआ हैवे global financial stability, crisis management, और development finance में केंद्रीय भूमिका निभाते हैं । Bretton Woods की विरासत यह है कि आर्थिक समस्याओं को अंतर्राष्ट्रीय सहयोग से ही हल किया जा सकता है, अलगाव से नहीं

 


निष्कर्ष

Inter-War Economy (1919-1939) का अध्ययन हमें सिखाता है कि आर्थिक संकट कैसे वैश्विक बन सकते हैं और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग क्यों जरूरी है। Great Depression ने दुनिया को दिखाया कि protectionism और uncoordinated policies विनाशकारी हो सकती हैं - World GDP में 15% गिरावट, 26% तक बेरोजगारी, और 60-70% व्यापार में कमी इसके प्रमाण हैंभारत में कृषि कीमतों में 50-60% गिरावट ने ग्रामीण संकट को इतना गहरा किया कि 1930 में Civil Disobedience Movement को बल मिला। USA के New Deal ने दिखाया कि सरकार active role निभाकर अर्थव्यवस्था को बचा सकती हैसबसे महत्वपूर्ण, 1944 के Bretton Woods Conference ने IMF और World Bank जैसी संस्थाएं बनाकर international cooperation की नींव रखी, जो आज भी विश्व अर्थव्यवस्था को स्थिरता देती हैं। Board Exam की तैयारी के लिए याद रखें: causes-effects अलग-अलग लिखें, India specific content जरूर शामिल करें, और key dates (1929 Crash, 1944 Bretton Woods) याद रखेंयह chapter आधुनिक वैश्विक अर्थव्यवस्था को समझने की कुंजी है!


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